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    उद् भव

    समय के शांत गलियारों में वर्ष 1963 में एक ऐसी संस्था का उदय हुआ, जो जिज्ञासु युवा मस्तिष्कों को समग्र शिक्षा प्रदान करने की आशा और अपेक्षाओं का जीवंत प्रमाण है। इसके उद्भव को समझने के लिए हमें छह दशकों की केन्द्रीय विद्यालय संगठन की यात्रा की ओर पीछे मुड़कर देखना होगा, जो समर्पित शिक्षकों द्वारा बुनी गई और दृढ़ संकल्पित नेतृत्व द्वारा समर्थित एक प्रेरणादायक गाथा है।

    यह पहल विशेष रूप से उन सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की आवश्यकताओं के उत्तर के रूप में सामने आई, जिन्हें माता-पिता के स्थानांतरण के साथ विद्यालय, पाठ्यक्रम, पाठ्य-पुस्तकें और परीक्षा बोर्ड बदलने पड़ते थे। इसी आवश्यकता से केंद्रीय विद्यालयों का बीजारोपण हुआ, उन्होंने जड़ें जमाईं, आकार में वृद्धि की और निरंतर समृद्ध होते हुए आगे बढ़े।

    इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए दृष्टिकोण सरल और स्पष्ट था—चरणबद्ध रूप से विद्यालयों की स्थापना। द्वितीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर भारत सरकार ने विभिन्न रक्षा प्रतिष्ठानों में संचालित 20 विद्यालयों को अपने अधीन लेकर उन्हें केंद्रीय विद्यालय नाम दिया। इसके बाद अनेक नागरिक क्षेत्रों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की टाउनशिप, उच्च शिक्षण संस्थानों तथा अन्य रक्षा/पुलिस प्रतिष्ठानों के साथ सहयोग स्थापित हुआ और इनके अंतर्गत विद्यालयों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती गई तथा इन्हें नया नाम ‘केन्द्रीय विद्यालय’ मिला।

    इस प्रकार यह कहानी आगे बढ़ी—ऐसी जड़ों की कहानी जिन्हें पोषण मिला, ऐसी शाखाओं की कहानी जो आकाश की ओर बढ़ीं और ऐसे फलों की कहानी जो शिक्षा, नवाचार तथा राष्ट्र निर्माण में विशाल योगदान की स्थायी भावना का प्रमाण बने।

    इन विद्यालयों की स्थापना एक समान दृष्टि और कुछ मूलभूत विशेषताओं के साथ हुई, जो आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं और पूरे विद्यालय समुदाय के केंद्र में बनी हुई हैं। इनमें सरकारी कर्मचारियों के लिए प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश, कुशल शिक्षकों की उपलब्धता एवं विकास के माध्यम से उच्च शैक्षिक मानकों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता, द्विभाषी शिक्षण माध्यम तथा एक समान पाठ्यचर्या और पाठ्य-पुस्तकों का प्रयोग प्रमुख आधार रहे।

    अपनी स्थापना के बाद से ही KVS ने अपनी विभिन्न गतिविधियों में भारतीय मूल्य-व्यवस्था को अपनाया। दैनिक प्रार्थनाओं और बृहदारण्यक उपनिषद के मंत्रों, जैसे ‘असतो मा सद्गमय’ तथा ‘दया कर दान विद्या का’, से लेकर KVS के गौरवशाली गान ‘भारत का स्वर्णिम गौरव केन्द्रीय विद्यालय लाएगा’ तक, इसकी गूंज देशभर में सुनाई देती रही है। इसके अतिरिक्त, सह-पाठ्यचर्या संबंधी गतिविधियों और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने तथा अपनत्व की भावना विकसित करने के लिए KVS की विशिष्ट ‘हाउस प्रणाली’ की शुरुआत भी इसकी प्रमुख विशेषताओं में रही है।

    IITs, BHU, IIMs और NCERT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग और समर्थन से KVS ने विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की यात्रा शुरू की। छह दशक बाद प्रारंभ में निर्धारित मानकों और वर्तमान समग्र एवं समावेशी वातावरण के बीच एक उल्लेखनीय तुलना सामने आती है। समान NCERT पाठ्य-पुस्तकों की व्यवस्था, मानकों को बनाए रखने के लिए सुव्यवस्थित कर्मचारी चयन प्रक्रिया तथा कार्मिकों के निरंतर क्षमता निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने शैक्षिक उत्कृष्टता और द्विभाषी दक्षता की दिशा में इसकी यात्रा की मजबूत नींव तैयार की।

    रक्षा क्षेत्र के 20 रेजिमेंटल विद्यालयों में बोया गया यह बीज राष्ट्र के बदलते शैक्षिक परिदृश्य के साथ निरंतर विकसित होता रहा। वर्ष 1963 के 20 केंद्रीय विद्यालयों से बढ़कर 1988 (रजत जयंती वर्ष) में 687 केन्द्रीय विद्यालय, 4.77 लाख विद्यार्थी तथा लगभग 32 हजार कर्मचारी; 2013 (स्वर्ण जयंती वर्ष) में 1,092 केन्द्रीय विद्यालय, 11.2 लाख विद्यार्थी तथा लगभग 58 हजार कर्मचारी; और 2023 (हीरक जयंती वर्ष) में 1,255 केन्द्रीय विद्यालय, 14 लाख विद्यार्थी तथा लगभग 57 हजार कर्मचारी हो गए।

    आज यह कभी छोटा-सा वृक्ष देश के प्रमुख शैक्षिक नेटवर्क का संरक्षक बन चुका है। इसके नेटवर्क में 1,255 विद्यालय हैं, जिनमें तीन विदेशों—मॉस्को, तेहरान और काठमांडू—में स्थित हैं। इसकी शाखाओं के अंतर्गत 14 लाख से अधिक बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और 55 हजार से अधिक कर्मचारियों द्वारा उनका मार्गदर्शन किया जा रहा है। उन 20 विद्यालयों का कई गुना विस्तार ‘KVS@60’ की जादुई ‘गणितमाला’ जैसा प्रतीत होता है, जो शैक्षिक विकास और अभूतपूर्व वृद्धि की कहानी बुनती है।

    परिणामोन्मुखता और विविधता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए वर्ष 1967 की बोर्ड परीक्षाओं का विश्लेषण भी समय के साथ इसकी यात्रा को प्रतिबिंबित करता है। विभिन्न शैक्षिक और सामाजिक पृष्ठभूमियों का समावेश करने वाला KVS अपने समावेशी दृष्टिकोण का प्रमाण है। यह यात्रा शिक्षकों और अधिकारियों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन एवं सहयोग को भी रेखांकित करती है, जिन्होंने परिवर्तन और विकास की परिस्थितियों में संस्था का मार्गदर्शन किया।

    KVS ने अपने मुख्यालय से लेकर 25 क्षेत्रीय कार्यालयों और 5 क्षेत्रीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (ZIETs) तक एक सुदृढ़ संगठनात्मक संरचना विकसित की। इस सुव्यवस्थित संरचना में KVS मुख्यालय एवं क्षेत्रीय स्तरों पर प्रशासनिक, शैक्षणिक और वित्तीय कार्यक्षेत्रों के साथ-साथ ZIET स्तर पर शिक्षक सशक्तीकरण गतिविधियाँ भी शामिल हैं। यह विशिष्ट संगठनात्मक संरचना योजना, कार्यान्वयन, निगरानी, मार्गदर्शन तथा शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों के समर्थन जैसे मुख्य कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करती है।

    केन्द्रीय विद्यालयों का विकास

    • 1963: रक्षा क्षेत्र में 20 केंद्रीय विद्यालय।
    • 1988 (रजत जयंती वर्ष): 687 केन्द्रीय विद्यालय, 4.77 लाख विद्यार्थी तथा लगभग 32 हजार कर्मचारी।
    • 2013 (स्वर्ण जयंती वर्ष): 1,092 केन्द्रीय विद्यालय, 11.2 लाख विद्यार्थी तथा लगभग 58 हजार कर्मचारी।
    • 2023 (हीरक जयंती वर्ष): 1,255 केन्द्रीय विद्यालय, 14 लाख विद्यार्थी तथा लगभग 57 हजार कर्मचारी।

    संगठनात्मक संरचना

    KVS की सुदृढ़ संगठनात्मक संरचना में मुख्यालय, 25 क्षेत्रीय कार्यालय और 5 क्षेत्रीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (ZIETs) शामिल हैं। यह संरचना प्रशासनिक, शैक्षणिक और वित्तीय कार्यक्षेत्रों के साथ-साथ ZIET स्तर पर शिक्षक सशक्तीकरण गतिविधियों को समाहित करती है तथा योजना, कार्यान्वयन, निगरानी, मार्गदर्शन और शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों के संचालन में सहायता करती है।